अखबार नामा: अलग ही है द टेलीग्राफ की रिपोर्टिंग,ज्यादातर हिंदी अखबारों ने एक पक्षीय और जोशीली रिपोर्टिंग की।

संजय कुमार सिंह

हमले की खबर है तो जिस पर हमला हुआ उसका पक्ष बराबर

आज के ज्यादातर अखबार युद्धमय हैं। हिन्दी अखबार कुछ ज्यादा ही जोश में। अखबारों से नहीं लगता कि किसी को युद्ध से चिन्ता या कोई डर है। सब समझ रहे हैं कि जिस तरह कल बम गिरा आए और 350 आतंकवादी मर गए उससे पाकिस्तान को सबक मिल गई और वह अब ऐसा या पहले जैसा कुछ करने की हिम्मत नहीं करेगा। अव्वल तो हमले की सफलता पर ज्यादातर अखबारों को कोई शक नहीं है और सबने सरकारी दावे को मान लिया है जबकि पाकिस्तान के दावे को बहुत कम तरजीह दी गई है। दैनिक भास्कर ने नाचती महिलाओं की फोटो छापी है तो नवोदय टाइम्स ने बताया है कि पाक सेना ने 55 भारतीय सैन्य चौकियो को निशाना बनाकर भारी गोलीबारी की है। यानी पाकिस्तान नहीं मानेगा।

इस माहौल में हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित ‘खबरों से आगे’ की खबर में हाऊ द बीजेपी विन्स (भाजपा कैसे जीतती है) के लेखक प्रशांत झा ने लिखा है, “विद एयर स्ट्राइक्स, मोदी लॉक्स हिज पॉलिटिकल स्क्रिप्ट फॉर पॉल्स”। इसका हिन्दी होगा, ‘हवाई हमलों से प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव के लिए अपना राजनीतिक स्क्रिप्ट तय कर लिया है’। इसमें प्रशांत ने लिखा है, चुनौतीपूर्ण राजनीतिक माहौल में आए इस स्क्रिप्ट में एक-दूसरे से जुड़ी तीन प्रमुख चीजें होंगी – एक “निर्णायक” और “शक्तिशाली” नेता की जिस पर भरोसा किया जा सकता है; एक “राष्ट्रवादी” पार्टी की जो भारतीय हितों की रक्षा करने के लिए तैयार हैं और एक “मजबूत” भारत की, जिसने अपने विरोधी से निपटने ता तरीका बदल दिया है।

हमले के बाद अखबारों से जिस संयम की अपेक्षा थी वह तो द टेलीग्राफ में ही है। अंग्रेजी के अखबारों ने मोटे तौर पर खबर छापी है पर हिन्दी अखबार सरकार के पक्ष में युद्ध का प्रचार करते लग रहे हैं। भारतीय वायु सेना द्वारा मंगलवार को सीमा पार कर पाकिस्तान में की गई कार्रवाई की खबर द टेलीग्राफ ने सबसे अलग अंदाज में दी है। सात कॉलम की इसकी खबर और शीर्षक तो अलग है ही, मुख्य खबर के साथ, क्या हुआ पर दो तरह की बातें प्रमुखता से छापी गई हैं। एक खबर दो कॉलम में है और दो लाइन का इसका शीर्षक है, बम? ‘हां’, मौतें? ‘नहीं’। बालाकोट डेटलाइन से यह रायटर की खबर है और अंदर के पन्ने पर जारी है। इसके ठीक ऊपर लीड के साथ टॉप में दो कॉलम का ही एक बॉक्स है – क्या हुआ, दो विवरण।

इसमें अखबार ने भारत के आरोप या दावे के साथ पाकिस्तान का भी पक्ष छापा है। इसमें कहा गया है कि भारत ने आतंकवादी शिविर को निशाना बनाया पर पाकिस्तान ने कहा है कि चुनौती दिए जाने पर भारतीय वायु सेना ने पेलोड को जब्बा टॉप पर गिरा दिया। यही रायटर की खबर में है। इसी तरह भारत ने आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या नहीं बताई पर सूत्रों ने दावा किया कि 350 आतंकवादी और उनके प्रशिक्षक मारे गए हैं। लेकिन पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर कहा कि कोई नहीं मरा है। अखबार ने बम हां, मौत नहीं – शीर्षक जो खबर छापी है वह बालाकोट डेटलाइन से रायटर की है। इसमें गांव वालों के हवाले से कहा गया है कि एक व्यक्ति की मौत हुई और उन्हें किसी अन्य के हताहत होने की सूचना नहीं है। एक ग्रामीण ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि वहां एक मदरसा है जिसे जैश-ए-मोहम्मद चलाता है। हालांकि, ज्यादातर ग्रामीण पड़ोस में आतंकी होने की बात बहुत संभल कर कर रहे थे। एक अन्य व्यक्ति ने अपना नाम नहीं बताया और कहा कि इलाके में आतंकवादी वर्षों से रह रहे हैं।

इस व्यक्ति ने कहा कि मैं उसी इलाके का हूं और यकीन के साथ कह सकता हूं कि वहां एक प्रशिक्षण शिविर है। मैं जानता हूं कि जैश के लोग इसे चलाते थे। अखबार ने लिखा है कि यह इलाका 2005 में आए भूकंप में बुरी तरह तबाह हुआ था। ग्रामीणों ने कहा कि कल गिराए गए बम मदरसे से एक किलोमीटर दूर गिरे। 25 साल के ग्रामीण मोहम्मद अजमल ने बताया कि उसने तीन बजे से कुछ ही पहले चार तेज आवाज सुनी और समझ नहीं पाया कि क्या हुआ है। सुबह समझ पाए कि यह हमला था। उसने बताया कि वहां हमने देखा कि कुछ पेड़ गिर गए हैं और जहां बम गिरे वहां चार गड्ढे हो गए हैं। एक क्षतिग्रस्त घर भी दिखा। ग्रामीणों ने कहा कि अपने घर में सो रहा एक व्यक्ति मारा गया है। बालाकोट से तीन किलोमीटर दूर एक ग्रामीण अतर शीशा ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा कि उसका नाम उजागर नहीं किया जाए। उसने फोन पर बताया कि बालाकोट में स्कूल तो चलता है पर हमले से बच गया।

हवाई हमले की सबसे संयमित खबर दैनिक भास्कर में है

हिन्दी अखबारों में आज दैनिक भास्कर अकेला है जिसने आग उगलते या वैसे, लड़ाकू विमानों की फोटो नहीं छापी है और ना कंप्यूटर के बनाए गए बम धमाकों की तस्वीर को खबरों के बैक ग्राउंड में लगाया है। हालांकि, दैनिक भास्कर ने शीर्षक में बताया गया है कि भारतीय वायु सेना ने 48 साल बाद सरहद लांघी और आतंकी अड्डा तबाह हो गया। इसके साथ भास्कर ने मौके पर मौजूद बालाकोट थाने के एसएचओ तस्वीर शाह और डिप्टी एसपी नियाज गुल से बातचीत छापी है। इसके मुताबिक कई कच्चे पक्के घर तहस नहस हो चुके थे। पर अंधेरा होने के चलते ज्यादा समझ में नहीं आई। सुबह सभी लोगों को गांव में जाने से मना कर दिया गया। तस्वीर शाह ने कहा कि हमलोगों की ड्यूटी चुनाव में लगा दी गई। वहां आर्मी और रेंजर अब तैनाती पर हैं।

अंग्रेजी अखबारों में हिन्दुस्तान टाइम्स कम युद्धमय नहीं है। पहले पन्ने से पहले का अधपन्ना मोदी जी की फोटो के साथ एलान कर रहा है, वायु सेना ने आग बरसाई। इस अधपन्ने के पीछे नेताओं की फोटो और उनके बयान हैं। शीर्षक है, भारतीय वायुसेना की तारीफ में राजनीतिज्ञ एकजुट। मुख्य खबर पहले पन्ने पर है दो शब्दों का शीर्षक है, टेरर अटैक्ड यानी आंतक पर हमला किया गया। पहले पन्ने पर चार कॉलम में एक खबर का शीर्षक है, वायु हमले का समय सिर्फ सात लोगों को मालूम था। मुझे इस खबर का मतलब नहीं समझ में आया क्योंकि पायलट और वायुसेना के लोगों को पता नहीं होगा तो यह संभव कैसे हुआ और पता था तो क्या अंदाजा नहीं होगा?

टाइम्स ऑफ इंडिया ने शीर्षक को अलग बनाने या भारतीय वायु सेना की तारीफ करने के लिए फ्लैग शीर्षक लगाया है, इंडिया एवेंजिंग फोर्स। यानी भारत की बदला लेने वाली या दंड देने वाली सेना। टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले पन्ने पर ही पाकिस्तान का भी पक्ष रखा है। इसके मुताबिक, पाकिस्तान की सेना ने इसे कम बताया पर सरकार ने इसे गंभीर आक्रमण कहा।

द हिन्दू ने सीधा सपाट शीर्षक लगाया है, भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश के कैम्प पर बम गिराया। एक कॉलम में पाकिस्तान ने आक्रमण की निन्दा की और दो कॉलम में सूक्ष्म हमले के लिए विपक्ष ने वायु सेना की प्रशंसा की जैसे शीर्षक लगाए हैं। दो कॉलम की एक खबर यह भी है कि भारत को ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस से समर्थन मिला। इसके साथ अमित शाह की फोटो के साथ एक खबर है, देश की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा, गठजोड़ या मोदी? यानी युद्ध औऱ राजनीति साथ-साथ। ऐसा हिन्दी में सिर्फ राजस्थान पत्रिका ने किया है।

इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक और गंभीर है, इंडिया स्ट्राइक्स टेरर, डीप इन पाक। मोटे तौर पर इसकी हिन्दी होगी, भारत ने आतंक पर हमला बोला, पाकिस्तान में अंदर घुसकर। नवभारत टाइम्स ने लिखा है कि वायु सेना पाकिस्तान में 65 किलोमीटर अंदर तक घुसी। अब हवाई हमले में 65 किमी अंदर घुसकर है तो सीमा पर क्या होगा यह मुझे समझ में आए तो बताता हूं। वैसे, इंडियन एक्सप्रेस में आज पहले पन्ने पर आधा विज्ञापन है। फिर भी, पाकिस्तान का पक्ष पहले पन्ने पर है। शीर्षक है, पाकिस्तान उलझन में पहले मना किया फिर जवाबी कार्रवाई की कसम खाई।

हिन्दुस्तान ने एलान कर दिया है, जैश का जोश जमींदोज। इसके साथ दो कॉलम की एक खबर है, ऑपरेशन बालाकोट पर हर पल थी मोदी की नजर। अखबार ने संपादक शशि शेखर की त्वरित टिप्पणी भी फोटो के साथ छापी है। इसका शीर्षक है, अंतत हम बेटों की मौत का बदला लेना सीख गए। इस शीर्षक के बाद पढ़ने की दिलचस्पी नहीं हुई। पाकिस्तान का पक्ष पूरे पन्ने पर (आज विज्ञापन नहीं है) सिंगल कॉलम की खबर में है। नौ लाइन की इस खबर का शीर्षक दो लाइन में है। पाकिस्तान बोला, अंधेरे में अंदाजा ही नहीं लग पाया।

नवभारत टाइम्स ने पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर शहीदों की तेरहवीं से पहले बदला शीर्षक से खबर छापी है। इसी अधपन्ने पर बॉटम है, जैश के सबसे बड़े सेंटर में स्ट्राइक के समय थे 300 आतंकी। मुख्य शीर्षक है, बालाकोट में चलते थे आतंक के कोर्स। नभाटा ने अधपन्ने के पीछे भारत के 12 मिराज देख भाग गए पाक के एफ-16 फाइटर। अखबार ने यह एलान भी किया है कि हमारी ताकत के सामने कमजोर है दुश्मन देश। अखबार ने तीन कॉलम की खबर से यह भी बताया है कि जैश सरगना मसूद अजहर का साला युसूफ मारा गया। इसमें लिखा है कि भारत या पाकिस्तान की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी पहले पन्ने पर मुख्य खबर का शीर्षक है, हाऊ इज द जैश? तबाह सर। इसके साथ नवभारत टाइम्स ने एक और खबर छापी है, हमलों से बौखलाए पाकिस्तान ने धमकाया, लेकिन हाथ बंधे हैं

नवोदय टाइम्स भी नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान की ही तरह युद्धमय है। सर्जिकल स्ट्राइक टू के तहत इस खबर का शीर्षक है, जोश में इंडिया। अखबार ने पहले ही पन्ने पर सतीश पेडनेकर की टिप्पणी है। इसका शीर्षक है, सैनिक और कूटनीतिक नजरिए से सफल ऑपरेशन। अखबार में पहले पन्ने पर पाकिस्तान का पक्ष नहीं है पर एक खबर में बताया गया है कि पाकिस्तान संसद में लगे शेम-शेम इमरान खान के नारे। एक दूसरी खबर में कहा गया है कि पाक सेना ने 55 भारतीय सैन्य चौकियो को निशाना बनाकर की भारी गोलीबारी।

दैनिक जागरण का शीर्षक है, पुलवामा का हिसाब पूरा। अखबार ने ये नहीं बताया है कि बाकी हमले एनपीए हुए या कोई नीरव मोदी लेकर भाग ले गया। अखबार की दूसरी बड़ी खबर है, सर्जिकल स्ट्राइक – 2 से पाकिस्तान पस्त। इसके साथ दो कॉलम का शीर्षक है, बौखलाए पाकिस्तान ने देर रात दागीं मिसाइलें। इमरान ने जवाब देने की बात कही, सिंगल कॉलम में है। एक खबर यह भी है, जांबाजों की वापसी के बाद सोने गए पीएम। और प्रशांत मिश्र की त्वरित टिप्पणी, इच्छा शक्ति और अदम्य साहस को सलाम ….।

अमर उजाला में इस खबर का शीर्षक है, पाकिस्तान में घुसकर जैश के तीन बड़े ठिकाने तबाह। उपशीर्षक है, तड़के 3:45 से 4:05 के बीच 80 किमी अंदर बालाकोट में वायुसेना की कार्रवाई। नवभारत टाइम्स ने लिखा है कि वायु सेना पाकिस्तान में 65 किलोमीटर अंदर तक घुसी। अमर उजाला का फ्लैग शीर्षक है, 20 मिनट, 12 मिराज, 1000 किलो बम। अखबार ने मुख्य खबर के साथ सिंगल कॉलम में खबर छापी है, कंधार और संसद हमले का भी हिसाब किया। अखबार ने लिखा है कि पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ले चुका जैश ही 2001 में संसद और जनवरी 2016 में पठानकोट हमले का भी जिम्मेदार था।

अखबार के मुताबिक, कल के हमले में मारा गया बताया जा रहा मसूद अजहर का बहनोई युसूफ 1999 में कंधार विमान अपहरण में भी शामिल था। यही नहीं, अखबार के मुताबिक, मसूद का बड़ा भाई इब्राहिम खान व मौलाना तन्हा भी ढेर हो गए। विमान अपहरण में इब्राहिम भी शामिल था। इस खबर में आगे कहा गया है, कश्मीर व अफगानिस्तान में सक्रिय मौलाना अम्मार भी मारा गया है। अखबार ने लिखा है कि इसके साथ ही पाकिस्तान में जैश का शीर्ष नेतृत्व खत्म हो गया। इस खबर का अंतिम वाक्य है, हालांकि, जैश का दावा है कि युसूफ हमले के वक्त बालाकोट में नहीं था। अखबार ने इस खबर का सूत्र नहीं बताया है।

एक तरफ खबर है कि हमले के समय की जानकारी सिर्फ सात लोगों को थी और दूसरी ओर अमर उजाला ने लिखा है कि 36 सुखोई, 5 मिग बैगअप में भी थे। 12 मिराज ऑपरेशन में तो थे ही। अखबार के मुताबिक रणनीति ऐसी रही कि जाम कर दिया पाक सेना का रडार। अमर उजाला ने भी जश्न मनाते लोगों की तस्वीर छापी है। यह प्रयागराज की है और एक कॉलम में ही छपी है। अन्य अखबारों के साथ आज राजस्थान पत्रिका भी युद्धमय है। यहां शीर्षक है, पाकिस्तान में घुसकर मारा। अखबार ने इस खबर के साथ पहले पन्ने पर प्रधानमंत्री की दो कॉलम की फोटो के साथ चुरू की रैली की खबर छापी है और बताया है कि वायुसेना की कार्रवाई के बाद यह प्रधानमंत्री की पहली प्रतिक्रिया पत्रिका थी। इस खबर का शीर्षक है, “सौगंध इस मिट्टी की, देश नहीं झुकने दूंगा : मोदी”।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट।