सुप्रीम कोर्ट: अगर विज्ञापन में जानकारी नहीं दी गई है तो भर्ती नियमों में ढील नहीं दी जा सकती

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर विज्ञापन में इस बात की जानकारी नहीं दी गई है तो भर्ती नियमों में ढील दिए जाने के अधिकार का प्रयोग नहीं किया जा सकता।

उत्तर प्रदेश विद्युत निगम में टेक्नीशियन ग्रेड-2 (Apprenticeship Electrical) की भर्ती के के लिए जो विज्ञापन दिया गया था उसमें कहा गया था कि साक्षात्कार के समय Department of Electronics Accreditation of Computer Courses (DOEACC) द्वारा कोर्स ऑन कम्प्यूटर कॉन्सेप्ट (सीसीसी) का प्रमाणपत्र पेश करना ज़रूरी होगा। भारी संख्या में छात्र जिन्होंने इस साक्षात्कार में हिस्सा लिया, यह प्रमाणपत्र पेश नहीं कर पाए। फिर उत्तर प्रदेश विद्युत निगम के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक ने आदेश दिया कि छात्रों को इस प्रमाणपत्र के बिना ही साक्षात्कार में बैठने दिया जाए लेकिन उम्मीदवारों को तीन माह की अवधि के भीतर यह प्रमाणपत्र जमा कराना होगा।

निगम ने जो यह ढील दी उसे हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी गई कि चयन की प्रक्रिया के शुरू हो जाने के बाद नियमों में ढील नहीं दी जा सकती और ऐसा करने का मतलब खेल के बीच में खेल के नियम को बदलना होगा। यद्यपि एकल पीठ ने इस याचिका को रद्द कर दिया, खंडपीठ ने कहा कि नियमों में इस तरह ढील दिए जाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती क्योंकि नियमों में तरह ढील दिए जाने के बाबत कोई चर्चा नहीं थी।

हाईकोर्ट के इस फ़ैसले से सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम हाईकोर्ट के विचारों से सहमत हैं…नियम और विज्ञापन में यह कहा गया कि साक्षात्कार के समय प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है। नियम में कहा गया है कि चयन के लिए इस प्रमाणपत्र को पेश करना एक अतिरिक्त अहर्ता है। नियम के इस प्रावधान और छपे हुए विज्ञापन को नहीं बदला जा सकता।”

पीठ ने उन उम्मीदवारों के पक्ष में भी फ़ैसला दिया जिन्होंने 28 मार्च 2012 के पहले अपना प्रमाणपत्र जमा करा दिया था।