आंकड़े मनमाफिक दिखाने की जुगत: मनपसंद राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए सरकार ने तोड़ा प्रोटोकॉल

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के रोजगार-बेरोजगारी सर्वे 2017-18 को छिपाने के बाद केंद्र सरकार ने एनएससी में मनपसंद सदस्यों की नियुक्ति के लिए नए नियम बना दिए हैं.

NewsPlatform की रिपोर्ट के मुताबिक केन्द्र सरकार ने एनएससी के सदस्यों और अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए बनी चयन समिति की संरचना में फ़ेर-बदल कर दिए हैं.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, चयन समिति में यह बदलाव अगस्त 2018 में लाया गया है. इसके बाद चयन समिति में सरकार के प्रतिनिधियों की संख्या को दोगुनी हो गई है. इससे सरकार एनएससी में नियुक्तियों को ज्यादा से ज्यादा प्रभावित कर पाएगी.

इससे पहले चयन समिति के अध्यक्ष नीति आयोग के उपाध्यक्ष होते थे. इसके साथ ही समिति में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर और दो सदस्य बाहर से होते थे.

अब नीति आयोग के उपाध्यक्ष की जगह कैबिनेट सचिव को लाया गया है. वे ही चयन समिति के अध्यक्ष होंगे. इसके साथ ही प्रधानमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव और बाहर से लाए गए दो विशेषज्ञ भी चयन समिति में होंगे. कैबिनेट सचिव के चयन समिति का अध्यक्ष बनने के बाद समिति की स्वायत्तता कम हो जाएगी.

एनएससी देश के सांख्यिकी तंत्र की निगरानी और समीक्षा करता है. यह एक स्वायत्त निकाय है.

एसएससी अध्यक्ष का पद राज्य मंत्री के बराबर होता है.

17 अगस्त 2018 को सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, चयन समिति के अध्यक्ष के तौर पर कैबिनेट सचिव को लाया गया है. इसके अलावा प्रधानमंत्री के अतिरिक्त सचिव, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स के पूर्व प्रोफेसर केएल कृष्णा और पूर्व एनएससी चेयरमैन राधा विनोद वर्मन को चयन समिति में शामिल किया गया है.

इससे पहले योजना आयोग के उपाध्यक्ष चयन समिति के अध्यक्ष होते थे. इसके साथ-साथ आरबीआई के डिप्टी गवर्नर और सांख्यिकी विशेषज्ञ या देश के सांख्यिकी तंत्र की जानकारी रखने वाले दो समाज विज्ञानी चयन समिति में शामिल होते थे.

सात अप्रैल 2015 को योजना आयोग को बदलकर नीति आयोग कर दिया गया था. जिसके बाद ‘डिप्टी चेयरमैन’ के पद को बदलकर ‘वाईस चेयरमैन’ कर दिया गया था.

जाहिर है कि एनएससी चेयरमैन की नियुक्ति में प्राथमिक प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है. सचिव स्तर के अधिकारी के पास राज्य मंत्री स्तर की नियुक्ति का अधिकार नहीं है. जानकारों का मानना है कि ऐसा सरकार अपने पक्ष में आंकड़ों को दिखाने के लिए कर रही है.

प्रणब सेन इंटरनेशनल ग्रोथ सेंटर के भारत कार्यक्रम के निदेशक और भारत के मुख्य सांख्यिकीविद रह चुके हैं. वह कहते हैं, “कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता में मुख्य सांख्यिकीविद का चयन किया जा सकता है, लेकिन एनएससी अध्यक्ष जो कि राज्य मंत्री स्तर का पद है, की नियुक्ति करना न्यायसंगत नहीं है. इससे पहले नीति आयोग के उपाध्यक्ष चयन समिति के अध्यक्ष होते थे. यह कैबिनेट मंत्री स्तर का पद है. एनएससी अध्यक्ष की नियुक्ति कम-से-कम कैबिनेट स्तर के मंत्री के माध्यम से तो होनी ही चाहिए. यह आधारभूत प्रोटोकॉल है.”