लोकसभा चुनाव 2019 में वीवीपीएटी: पर्ची मिलान के अनसुलझे सवाल

लोकसभा चुनाव 2019: मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को उम्मीद है कि कितनी संख्या में पर्चियों की गिनती की जानी चाहिए, इस बारे में चुनाव के पहले संस्थान के विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट दे देंगे। उसके बाद आयोग विचार कर कोई फैसला लेगा।

न्यूज़ प्लेटफार्म के लिए दीपक रस्तोगी की रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर पहली बार पार्टी के चुनाव चिन्ह के साथ ही उम्मीदवारों की तसवीरें भी होंगी। साथ ही, सभी मशीनों के साथ वोटर वैरीफाईएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) के इस्तेमाल को भी मंजूरी दी गई है। चुनाव आयोग ने इन इंतजामों का ऐलान तो किया, लेकिन कुछ मुद्दों पर वह खामोश रहा। पहला, कितनी पर्चियों का मिलान मतगणना के समय किया जाएगा? दूसरे, क्या आयोग विपक्ष की उस मांग पर विचार करेगा, जिसमें 10 से लेकर 50 फीसद पर्चियों के मिलान की मांग की गई? तीसरे, पर्चियां गिनी गईं तो नतीजे घोषित होने की समयावधि कितनी प्रभावित होगी?

सांख्यिकी संस्थान की रिपोर्ट का इंतजार

वीवीपीएटी को लेकर चुनाव आयोग को भारतीय सांख्यिकी संस्थान के विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार है। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को उम्मीद है कि कितनी संख्या में पर्चियों की गिनती की जानी चाहिए, इस बारे में चुनाव के पहले संस्थान के विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट दे देंगे। उसके बाद आयोग विचार कर कोई फैसला लेगा। उम्मीद है कि मतगणना के पहले व्यवस्था पूरी कर ली जाएगी। दरअसल, एक बूथ पर औसतन 1200 वोट होते हैं और विवाद की स्थिति में अब तक सिर्फ छह पर्चियों का मिलान किया जाता रहा है।

वीवीपीएटी में इस बार प्रावधान

वोट डालने के बाद मतदाता को छह सेकेंड तक वीवीपीएटी मशीन में पर्ची दिखेगी, जिसे देखकर वह जान सकेंगे कि वोट सही उम्मीदवार को गया है या नहीं। फिर यह पर्ची एक सील कंटेनर में गिर जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन मशीनों का इस्तेमाल चुनावों में ज्यादा पारदर्शिता लाने के लिए किया जा रहा है। यह पहली बार होगा जब उन्हें आम चुनावों में प्रयोग किया जाएगा। विधानसभा चुनावों में वीवीपीएटी और ईवीएम के इस्तेमाल कोर लेकर हुए विवादों के बाद चुनाव आयोग ने इन मशीनों को ले जाने वाली गाड़ियों में जीपीएस लगाने का फैसला किया है।

कितनी मशीनों का इंतजाम

देश के सभी बूथों पर वीवीपीएटी मशीनें 2019 चुनावों से पहले मुहैया कराने में देरी की आशंका को खारिज करते हुए हाल ही में चुनाव आयोग ने कहा कि 16.15 लाख वीवीपैट मशीनों का आॅर्डर दिया गया है। चुनाव आयोग मशीन के उत्पादन और वितरण पर नजर बनाए हुए है। सभी मशीनें तय समय के भीतर बूथों पर मुहैया करा दी जाएंगी। केंद्रीय कैबिनेट ने अप्रैल 2017 में 3174 करोड़ रुपए मंजूर किए।

कैसे आई वीवीपीएटी मशीन

चार अक्तूबर, 2010 को आयोजित सर्वदलीय बैठक में ईवीएम के इस्तेमाल को जारी रखने के बारे में व्यापक सहमति थी। कई राजनीतिक दलों ने सुझाव दिया कि वीवीपीएटी को शामिल करने की संभावना तलाशी जानी चाहिए। चुनाव आयोग ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बंगलौर (बीईएल) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद (ईसीआईएल) को वीवीपीएटी प्रणाली का नमूना (प्रोटोटाइप) विकसित करने का निर्देश दिया। जुलाई, 2011 में तिरूअनंतपुरम, दिल्ली, जैसलमेर, चेरापूंजी तथा लेह में किया गया। दूसरा प्रयोग जुलाई-अगस्त, 2012 में किया गया।

नियमों में संशोधन

भारत सरकार ने 14 अगस्त, 2013 को एक अधिसूचना के जरिए चुनाव कराने संबंधी नियम, 1961 को संशोधित किया। इससे आयोग को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के साथ वीवीपीएटी के इस्तेमाल का अधिकार मिला। सितंबर, 2013 में नगालैंड के त्वेनसांग में नोकसेन विधानसभा चुनाव में वीवीपीएटी का प्रयोग किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर 2013 में सुब्रह्मण्यम स्वामी बनाम चुनाव आयोग मामले में व्यवस्था देते हुए कहा कि वीवीपीएटी स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनावों के लिए जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को 2014 के आम चुनावों के लिए वीवीपीएटी लागू करने का निर्देश दिया था। वर्ष 2016 में 33,500 वीवीपीएटी मशीन का इस्तेमाल 2017 में गोवा में हुआ था। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना के विधानसभा चुनावों में 52,000 वीवीपैट का इस्तेमाल किया।