मोदी सरकार में हुई बीएसएनएल की हालत खस्ता, नहीं दे पा रहा अपने कर्मचारियों को वेतन

जहां एक ओर जियो जैसी निजी क्षेत्र की टेलीकॉम कंपनियां लाभ कमा रही हैं वहीं सरकारी कंपनी बीएसएनएल लगातार घाटे में जा रही है. घाटे का आलम कुछ इस तरह हो चुका है कि कंपनी अपने कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दे पा रही है.

खबरों के मुताबिक बीएसएनएल के कर्मचारियों को फरवरी महीने का वेतन अब तक नहीं मिला है. वैसे बीएसएनएल घाटे में तो काफी समय से चल रहा था, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि कंपनी अपने कर्मचारियों को वेतन देने में असफल रही है.

आमतौर पर बीएसएनएल महीने की पहली तारीख को वेतन जारी कर देता है. लेकिन इस बार महीने के 10 दिन बीत जाने के बाद भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल सका है. रिलायंस जियो के आने के बाद से टेलीकॉम कीमतों में तेजी से गिरावट आई है. इससे पहले से आर्थिक संकट से गुजर रहे बीएसएनएल का संकट और गहराता चला गया.

बीएसएनएल की एक समस्या इसका बड़ा कर्मचारी नेटवर्क भी है. जबकि दूसरी टेलीकॉम कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ काम कर रही हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक केवल महाराष्ट्र सर्किल का वेतन ही 60 करोड़ रुपये है. पूरे देश में इस तरह के 20 सर्किल हैं जिनका कुल वेतन करीब एक हजार दो सौ करोड़ रुपये मासिक होता है.

खबरों के मुताबिक बीएसएनएल के कुल राजस्व का 55 फीसदी हिस्सा केवल कर्मचारियों के वेतन में निकल जाता है. इसके अलावा वेतन 8 फीसदी सालाना की दर से बढ़ता भी है, लेकिन राजस्व में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है.

उधर बीएसएनएल के कर्मचारी संघ ने टेलीकॉम मंत्री को इस बारे में लिखकर अपनी चिंता जताई है. संघ ने टेलीकॉम मंत्री मनोज सिन्हा से फंड देने की बात कही है ताकि कर्मचारियों को वेतन दिया जा सके. इस पत्र में कहा गया है कि दूसरी टेलीकॉम कंपनियां भी वित्तीय संकट से गुजर रही हैं, लेकिन वहां बड़ी मात्रा में धन जारी करके स्थिति को नियंत्रण में रखा जा रहा है.