हालात: बीजेपी की नीतियों के खिलाफ 70 संगठन, 50 शहरों में चलाएंगे एंटी मोदी कैंपेन

बदायूं से ही इस अभियान की शुरुआत इसलिए की जा रही है क्योंकि जेएनयू से साल 2016 में लापता हुआ छात्र नजीब अहमद भी बंदायू का ही निवासी था।

जनसत्ता ऑनलाइन के मुताबिक रोजगार के मोर्चे पर केन्द्र की मोदी सरकार को काफी आलोचना का शिकार होना पड़ा है। राजनीतिक पार्टियां रोजगार के मुद्दे पर भाजपा को घेरने की कोशिशों में जुटी हैं। अब पूरे देश में करीब 70 संगठन भी मोदी सरकार के खिलाफ खड़े हो गए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, देशभर के करीब 70 गैर-सरकारी संगठन केन्द्र की मोदी सरकार के खिलाफ 50 शहरों में मोदी विरोधी अभियान चलाएंगे। इस अभियान के तहत ये संगठन मोदी सरकार की विफलता के बारे में लोगों को बताएंगे। इस अभियान का नेतृत्व यंग इंडिया नेशनल कॉर्डिनेशन कमेटी करेगी। जिसमें करीब 70 संगठन शामिल हैं। इनमें से अधिकतर संगठन वामपंथ समर्थित बताए जा रहे हैं।

खबर के अनुसार, ये संगठन अपने अभियान की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बंदायू से अप्रैल के पहले हफ्ते में करेंगे। बता दें कि लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होना है। इन संगठनों में शामिल और छात्र संगठन AISA के एन.साई बालाजी बताते हैं कि ‘यंग इंडिया नेशनल कॉर्डिनेशन कमेटी ने बीती 7 फरवरी को भी सरकार के खिलाफ एक मार्च का आयोजन किया था। इस दौरान युवाओं ने कई अहम मुद्दे उठाए और सरकार पर आरोप लगाए कि बेहतर शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे पूरे नहीं किए गए। यही वजह है कि YINCC ने फैसला किया है कि वह मोदी सरकार के खिलाफ अभियान चलाएगी और लोगों से उन्हें वोट ना देने की अपील करेंगे।’

बालाजी ने बताया कि बदायूं से ही इस अभियान की शुरुआत इसलिए की जा रही है क्योंकि जेएनयू से साल 2016 में लापता हुआ छात्र नजीब अहमद भी बंदायू का ही निवासी था। वहीं इस अभियान में शामिल समाजवादी युवजन सभा के एक सदस्य निसार अहमद ने बताया कि मोदी ने वादा किया था कि उनकी सरकार हर साल 2 करोड़ लोगों को रोजगार देगी। उन्होंने 2000 नौकरियां भी नहीं दी। सपा, बसपा और रालोद लोगों से अपील करेंगी कि वह भाजपा को वोट ना दें। ऑल इंडिया रेलवे अप्रेंटिस के एक सदस्य ने बताया कि मोदी ने इलाहाबाद में सफाईकर्मियों के पैर धोने का ड्रामा किया, यदि उन्हें इतनी ही चिंता है तो मोदी उन्हें रोजगार देते। SFI की एक सदस्य ने दावा किया कि वह मोदी के विरुद्ध नहीं हैं, बल्कि उनका विरोध आरएसएस की विचारधारा को लेकर है, जिस पर मौजूदा सरकार चल रही है