हालात: अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर मोदी सरकार का दोहरा रवैया?

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग से दो हिंदू लड़कियों के कथित जबरन धर्म-परिवर्तन पर रिपोर्ट सौंपने को कहा है. पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में हुई इस घटना पर सुषमा स्वराज के ट्वीट के बाद भारत में अल्पसंख्यक वर्ग पर होने वाले हमलों के दौरान अक्सर चुप्पी साधे रखने वाली मोदी सरकार की नीयत और रणनीति पर सवाल उठे.

अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ के मुताबिक सुषमा के ट्वीट को सरकार के अलग-अलग मंत्रियों का समर्थन मिला. पर उनके इस ट्वीट के बाद लोगों ने उन्हें गुरूग्राम में हुई घटना के बारे में भी याद दिलाया, जिस पर सरकार के किसी मंत्री ने तब तक कोई टिप्पणी नहीं की थी.

दरअसल, स्वराज ने शनिवार को ट्वीट कर जानकारी दी थी कि उन्होंने भारतीय उच्चायोग से जबरन धर्म -परिवर्तन के मामले में रिपोर्ट सौंपने को कहा है. साथ-साथ नई दिल्ली से इस्लामाबाद विदेश कार्यालय को भेजे गए पत्र में भी मामले में कार्रवाई करने और पाकिस्तान में अल्पसंख्यक वर्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई.

रविवार को पाकिस्तानी सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने स्वराज के ट्वीट पर जवाब देते हुए भारत में अल्पसंख्यक वर्ग की बुरी हालत होने का जिक्र किया. उन्होंने ट्वीट में लिखा, “मैम, ये पाकिस्तान का आंतरिक मामला है और बाकी ये मोदी का भारत नहीं है, जहां अल्पसंख्यक वर्ग के साथ बुरा व्यवहार हो. ये इमरान का नया पाक है. मुझे उम्मीद है कि आप भारतीय अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार पर इतनी ही समझदारी से कार्रवाई करेंगी.”

इमरान खान सत्ता में आने के बाद बीते कुछ समय से इन मुद्दों कई टिप्पणियां कर चुके हैं. लेकिन भारत की ओर से उनके आरोपों का लगातार खंडन करते हुए उन पर दोगले होने और पाकिस्तान में अल्पसंख्यक वर्ग की स्थिति दयनीय होने के आरोप लगाए गए.

1972 शिमला समझौते में दोनों देशों के बीच एक-दूसरे की आंतरिक मामलों में दखल नहीं देने पर करार हुआ था. समझौते के बाद भारत में अल्पसंख्यक वर्ग की स्थिति पर पाकिस्तान की ओर से की गई कोई भी टिप्पणी भारतीय सरकार को नाराज करने के लिए काफी थी.

फवाद चौधरी और सुषमा स्वराज के बीच ट्वीट का सिलसिला यहीं नहीं रुका. स्वराज ने ट्वीट करते हुए कहा, “माननीय मैंने भारतीय हाई कमीशन से केवल इस मामले में रिपोर्ट मांगी है. पर मेरा इतना कहना ही आपको परेशान करने के लिए काफी था. ये आपके अपराध-बोध को ही दिखाता है.”

स्वराज के दूसरे ट्वीट के जवाब में उन्होंने कहा, “मैम मुझे ये जानकर खुशी हुई कि भारत सरकार में ऐसे लोग हैं, जो दूसरे देशों में अल्पसंख्यक अधिकारों की चिंता करते हैं. मुझे उम्मीद है कि आप अपने देश में भी अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए ऐसे ही खड़ी होंगी.”

बीते कुछ समय से गुरूग्राम में हुई घटना का वीडीयो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे तमाम विपक्षी नेताओं ने सत्तारूढ़ पार्टी की बहुसंख्यक राजनीति से जोड़ते हुए आलोचना की है.

दूसरी ओर शुरुआती जांच में गुरूग्राम पुलिस ने इस मामले में सांप्रदायिक पक्ष होने से इनकार किया है. लेकिन घटना के शिकार मोहम्मद साजिद के भतीजे और शिकायतकर्ता दिलशाद ने पुलिस रिपोर्ट में बताया कि घर में घुसकर परिवार के लोगों को मारने वाले 20-25 गुंडों ने उन्हें लगातार कहा कि “वो पाकिस्तान में जाकर खेलें.”

ये पहली बार नहीं है जब मोदी सरकार ने अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों पर चुप्पी साधी हो. इससे पहले भी इन मुद्दों पर मोदी सरकार का रुख बेहद सतही रहा है. सरकार की ओर से इन मामलों की सुध लेने वालों कोई नहीं होता, ये अक्सर देखा गया है कि मंत्री किसी ठंडे हो चुके मुद्दे पर अपने विचार काफी देर से रखते हैं. इसके अलावा देखा गया है कि संसद में उठे इन मुद्दों पर सरकार यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेती है कि यह न्याय और सुरक्षा से जुड़ा मामला है, जो राज्य सरकार के अंतर्गत आता है.