एंटी-सैटेलाइट परीक्षण पर पीएम मोदी का आधा सच!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर जनता को चौंकाने की कोशिश की है. संबोधन से पहले नरेन्द्र मोदी ने 11बजकर 23 मिनट पर ट्वीट कर कहा कि वह 11.45 बजे महत्वपूर्ण संदेश देने वाले हैं. हालांकि उनका राष्ट्र के नाम संबोधन देर से शुरू हुआ.
टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया पर एक साथ प्रसारित संदेश में पीएम मोदी अंतरिक्ष में भारत की उपलब्धि के लिए भारतीयों को गर्व महसूस करने की बात कहते नजर आए. उन्होंने कहा कि भारत अंतरिक्ष में एंटी सैटेलाइट मिसाइल लॉन्च करने वाले देशों में शामिल हो गया है.
अमरीका, रूस और चीन के बाद भारत चौथा देश है जिसके पास यह क्षमता है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह परिक्षण ओडिशा में हुआ है.
जानकार मानते हैं कि इस कदम से अंतरिक्ष में भारत की क्षमता बढ़ी है. अब हम दुश्मन देशों या भारत की निगरानी करने वाले उपग्रहों को निशाना बनाने में सक्षम हो गए हैं.

नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में कहा, “अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर दूर लो अर्थ ऑर्बिट (एलइओ) सैटलाइट को मार गिराया है. यह एक पूर्व निर्धारित लक्ष्य था और तीन मिनट के भीतर इसे हासिल किया गया. मिशन शक्ति यह बहुत ही कठिन ऑपरेशन था जिसे हमने हासिल किया. हम इसके लिए अपने वैज्ञानिकों को बधाई देते हैं.”

भारत ने अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक सैटेलाइट को मिसाइल से मार गिराया है. यह भारत का एंटी सैटेलाइट हथियार का पहला प्रयोग है.
नरेन्द्र मोदी के बयान के बाद कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया कि इसकी नींव साल 2012 में ही रखी जा चुकी थी. तब कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार थी.

सुरजेवाला ने ट्वीट किया, “डीआरडीओ को इस सफलता के लिए बहुत बधाई हो. इस मिशन की नींव यूपीए-कांग्रेस सरकार में साल 2012 में डाली गई थी. स्पेस टेक्नोलॉजी के मामले में भारत पहले स्थान पर रहा है जिसके लिए पंडित नेहरू और विक्रम साराभाई के विज़न को श्रेय दिया जाना चाहिए.

कांग्रेस के इस दावे की तस्दीक साल 2012 में इंडिया टुडे में छपी रिपोर्ट भी करती है.

रिपोर्ट में संदीप उन्नीथन लिखते हैं, “भारत के पास स्पेस सैटेलाइट को नष्ट करने की क्षमता विकसित हो गई है. डिफेंस रिसर्च और डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन(डीआरडीओ) के वैज्ञानिक सलाहकार विजय सारस्वत के हवाले से कहा गया था कि एंटी सैटेलाइट(एएसएटी) के कामों को पूरा कर लिया गया है.

जनवरी 2007 में चीन ने एक मौसमी उपग्रह को नष्ट किया था. जिसके बाद भारत में एंटी सैटेलाइट की जरूरत महसूस की जाने लगी थी.
जानकारों का मानना है कि अंतरिक्ष में उपग्रह को नष्ट करने से अंतरिक्ष में कूड़ा बढ़ता है. इससे दूसरे सैटेलाइट के लिए खतरा पैदा हो सकता है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय दबाव और अंतरिक्ष एथिक्स की वजह से इलेक्ट्रॉनिक टेस्ट के माध्यम से एंटी सैटेलाइट की क्षमता को उन्नत करने का निर्णय लिया था. वीके सारस्वत ने भी कहा कि मिशन को साल 2014 में लांच कर लिया जाता लेकिन इसे उस समय अनुमति नहीं मिल पाई थी.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केन्द्र सरकार की ओर से जल्दबाजी में परीक्षण करने का निर्णय लिया गया है.

बीबीसी में छपी खबर के मुताबिक 24 जनवरी 2019 को माइक्रो सैट-आर लोअर अर्थ ऑर्बिट में छोड़ा गया था. वेब पोर्टल ने विज्ञान पत्रकार पल्लव बागला के हवाले से कहा है कि यह सैटेलाइट 277 किलोमीटर की ऊंचाई पर छोड़ा गया था. और इसी उपग्रह को निशाना बनाया गया है. हालांकि इस खबर की पुष्टि नहीं हुई है.

पीएम मोदी की ओर से चुनाव से ठीक पहले ऐसी घोषणा कई सवाल खड़े करती हैं, उसपर जब आदर्श चुनाव आचार संहिता देशभर में लागू है.
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