टुकड़े-टुकड़े गैंग बनाम डीएसपी देविन्दर सिंह…

आज के हिन्दी अखबारों में डीएसपी देविन्दर सिंह से संबंधित पहले पन्ने की खबरें इस प्रकार हैं…

  1. नवोदय टाइम्स
    देशद्रोही डीएसपी के रिश्तेदारों पर छापा, 7.5 लाख कैश, आर्मी बेस का मैप व हथियार बरामद। पूछताछ में माना – पाक व खुफिया एजेंसी भारत में आतंकियों को भेजती थी पैसे
  2. हिन्दुस्तान
    डीएसपी देविन्दर सिंह बर्खास्त होगा
  3. राजस्थान पत्रिका
    देविन्दर बर्खास्त, बनने वाला था एसपी। फ्लैग शीर्षक, एनआईए कर रही है पूछताछ आतंकवादियों के साथ पकड़ा गया था डीएसपी

दैनिक भास्कर, अमर उजाला, दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स में देविन्दर सिंह से संबंधित कोई खबर पहले पन्ने पर नहीं है। सिंगल कॉलम में पहले पन्ने की औपचारिकता निभाने के लिए छपी हो तो कह नहीं सकता पर देश द्रोह जैसे मामले में गिरफ्तार एक डीएसपी से संबंधित खबरों के शीर्षक देखिए और नकाब पहनकर देशद्रोही नारे लगाने के वीडियो पर बनी और बनाई गई खबरें याद कीजिए।

इस डीएसपी का संबंध पुलवामा से भी है पर उससे संबंधित कितनी सूचनाएं और बयान छपे तथा टुकड़े-टुकड़े गैंग को आपके दिमाग में जिन्दा रखने के लिए कितनी खबरें छपीं उन्हें याद कीजिए। अब तो यह भी साफ हो गया है कि नकाबपोश अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े थे पर पहचाने नहीं जा रहे हैं।

आप समझ सकते हैं क्यों?

लेकिन जो पहचाने नहीं गए उन्हें टुकड़े टुकड़े गैंग कहकर प्रचारित किया गया। पुलिस की वर्दी में देशद्रोह का काम करता था उसे देशद्रोही कहने वाले कितने लोग हैं और (अदृश्य, अनजाने) टुकड़े-टुकड़े गैंग को देशद्रोही कहने वाले कौन हैं – समझ में आ रहा है?

द टेलीग्राफ में इससे संबंधित खबर का शीर्षक है, जम्मू और कश्मीर के पुलिसवाले की गिरफ्तारी से कई शंकाएं उभरीं, घपलों-घोटालों के पुलिन्दे से कंपकपी छूटी। इस शीर्षक से आप समझ सकते हैं कि खबर कैसी होनी चाहिए।

धीरे-धीरें आएंगी (आनी चाहिए) पर हिन्दी अखबारों के शीर्षक से अनुमान लगाइए कि भविष्य में वे इस मामले में कैसी खबरें दे सकते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से