नज़रिया

पुलवामा में आतंकी हमले से शोक में डूबे देश को आज 3 दिन पूरे हुए, सो अब चंद बेहद मौजूं सवाल…

छोटे से छोटे चौकी थाने के बोर्ड पर लिखा होता है ‘सावधानी हटी दुर्घटना घटी”. हमारी असावधानी का फायदा बार बार उठाया है दुश्मनों ने। घर के अंदर नक्सली निशाना बनाते हैं। घर के बाहर सीमापार से निशाना बनाते हैं। कश्मीर के उपद्रवग्रस्त इलाकों में निशाना बनते है – मगर CRPF के जवानों को अर्धसैनिक बल कहा जाता है! उनके मुखिया के तौर पर किसी आईपीएस को बिठा दिया जाता है। जो आता है तो मैदानी कानून व्यवस्था की समझ लिये मगर उसे नक्सली, अतिवादी, आतंवादी मूवमेंट में अपने जवानों से काम लेना पड़ता है। CRPF से ही उसके मुखिया बनें तो ज्यादा अच्छा नहीं होगा? मुझे बताया गया, रक्षा करने वाले इन जवानों को पेंशन की सुविधा नहीं है! क्या ये सच है?
इनकी शिकायत सिस्टम से है कि इनकी शहादत को “शहीद” का दर्जा नहीं दिया जाता? क्या ये वाजिब है?
इनके शहीद होने पर सेना के रिटायर्ड अधिकारी मीडिया में देश के मूड के साथ तो गुस्से में फड़कते दीखते हैं. शहादत होता है अर्द्धसैनिक बलों का और मीडिया में ज्ञान देते हैं सेना के पूर्व अधिकारी, मीडिया को केवल पूर्व CRPF जवानों, अधिकारियों से ही ऐसे मौकों पर बात करनी चाहिये, है कि नहीं? […]

देश

पुलवामा हमला : अब तो मान लीजिए मोदी सरकार फेल है!

ये सवाल पूछने पर राष्ट्रद्रोही कहलाने का खतरा है! पर हम पूछेंगे जरूर. कश्मीर में तैनात अर्धसैनिक बलों के आने-जाने के लिए 1 जनवरी 2018 को दिल्ली-श्रीनगर हवाई सेवा शुरू की गई लेकिन, सिर्फ सात महीने बाद 31 जुलाई 2018 को इसे बंद कर दिया गया। कमाल की बात यह है कि 1 जनवरी से हवाई सुविधा शुरू करने के आदेश की चिट्‌ठी 11 अप्रैल को जारी की गयी यानी सिर्फ 4 महीने ही यह सेवा जारी रह पाई, अर्धसैनिक बलों के जवानों के लिए दोबारा हवाई सेवा शुरू करने का प्रस्ताव चार महीने से गृह मंत्रालय में लंबित है। इसे वित्तीय कारणों से मंजूरी नहीं मिली है।
जी हां वित्तीय कारणों से. यानी सरकार के पास अपने जवानों को बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करने के लिए भेजने के लिए भी पैसे का अभाव है और हमारे प्रधान सेवक इन चार सालो में लगभग 84 विदेशी दौरे कर चुके हैं जिसमें करीब 280 मिलियन डॉलर यानी 2 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. […]

नज़रिया

पुलवामा हमले के बाद कश्मीरियों पर हमले: क्या सिर्फ कश्मीर ही देश का अभिन्न हिस्सा हैं कश्मीरी नहीं?

रोहित प्रकाश इस बात में कोई संदेह नहीं कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर किए गए आत्मघाती हमले ने देश में जबरदस्त आक्रोश पैदा किया है. ऐसे मौकों पर […]

देश

पुलवामा अटैक: मातम में रोएं तो किस पर?

मैं फिर रोने के बजाय गुस्से में हूं और वह भी मोदी-डोवाल पर! मगर मैं हूं क्योंकि ये हर तरह से सीधे जिम्मेवार हैं, सीमा पार से 100-150 किलोग्राम आरडीएक्स आ जाने की लापरवाही के लिए! रोते हुए इनकी छप्पन इंची छाती को ही हमें कूटना चाहिए! पाकिस्तान का नाम ले कर स्यापा करने की जरूरत नहीं है. वह तो हमें 72 साल से रूला रहा है. तभी तो मैंने, हम सबने 2014 में मोदी को लिवा लाने की ठानी थी. बावजूद इसके पांच साल बाद भी और भयावह रोना है तो छाती तो अपनी ही कूटेंगे. […]

नज़रिया

विचारणीय मुद्दा: कश्मीर में आतंकवाद पर मोदी सरकार की नाकामियां तो जग-जाहिर हैं

14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में लगभग 40 सीआरपीएफ जवानों की मौत ने देश को झकझोर दिया है. उचित ही है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के दलों और नेताओं […]

अखबारनामा

अख़बार नामा: मायावती ने भाजपा व कांग्रेस पर सरकारी आतंक फैलाने का आरोप लगाया, अखबारों ने नहीं दी जगह

संजय कुमार सिंह हिन्दी अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह नहीं दी बसपा प्रमुख मायावती ने गुरुवार को एक ट्वीट कर मध्य प्रदेश की कांग्रेस व उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर सरकारी आतंक फैलाने […]

अखबारनामा

अख़बार नामा: राफेल पर सीएजी रिपोर्ट के बहाने अख़बार कर रहे सरकार की सेवा

संजय कुमार सिंह नभाटा सबसे बेशर्म, हिन्दुस्तान ने खबर छापने की औपचारिकता भर निभाई है रफाल पर सीएजी की रिपोर्ट कल संसद में पेश की गई और आज इसकी खबर सभी अखबारों में पहले पन्ने […]

अखबारनामा

अख़बार नामा: ख़बर नहीं बस ख़बरों के नाम पर अख़बार छपता है, हिन्दुस्तान छपता है…रवीश कुमार ने आज फिर ली ‘हिंदुस्तान’ की क्लास!

रवीश कुमार ख़बर नहीं बस ख़बरों के नाम पर अख़बार छपता है, हिन्दुस्तान छपता है… गर्त इतना गहरा हो गया है कि बात में तल्ख़ी और सख़्ती की इजाज़त मांगता हूं। आप आज का हिन्दुस्तान […]

नज़रिया

बजट 2019 को ‘प्रधानमंत्री व्यग्र-व्याकुल योजना’ कहें, तो गलत नहीं होगा

मोदी सरकार में योजनाओं के तरह-तरह के नाम रखे जाते हैं. ऐसे में जो 2019 का ‘चुनावी बजट’ है, इसे प्रधानमंत्री व्यग्र-व्याकुल वोट प्राप्ति योजना का नाम दिया जा सकता है. सरकार ने इस बजट […]

नज़रिया

प्रधानमंत्री को झूठ नहीं बोलना चाहिए- रवीश कुमार

Ravish Kumar : प्रधानमंत्री को झूठ नहीं बोलना चाहिए, इतना भी नहीं कि हँसी भी न आए… कौन मानता है इस देश में कि लूट सौ फ़ीसदी ख़त्म हो गई है। प्रधानमंत्री ने एक क़ानून […]